महंगाई पर निबंध

निरंतर बढ़ती महंगाई ने आम आदमी को आज तबाह कर रखा है। समाज में एकदम नीचे तबके के लोग जो आर्थिक दृष्टि से बेहद कमजोर लोगों हैं का जीना दुश्वार हो गया है। वे सुबह कहते हैं तो शाम की चिंता सताती है और शाम को खाने के बाद दूसरे दिन की चिंता सताता है।

अच्छे मध्यवर्गीय परिवारों की हाल यह है कि पारिवारिक खर्चे के बजट की चादर सब जगह छोटी पड़ रही है। चादर से किसी का सिर बाहर निकल रहा है तो कहीं किसी का पर। चीजों का उत्पादन तो बढ़ता नहीं पर पैसों का मूल घटता जा रहा है। आम आदमी इसी सोच में लगा रहता है कि वह अपनी जिंदगी की गाड़ी को खींचे तो कैसे खींचे।

महंगाई पर निबंध

हमारी सरकार महंगाई पर रोक लगा देने के दावे करती है वह टीवी से प्रतिदिन के स्थिर या कमते मूल्यों की घोषणा करती है। घोषणाओं के वे स्वर आसमान में मड़वाते रहते हैं और धरती पर उपभोक्ता सामग्रियों के मूल्य आसमान की ओर चढ़ते रहते हैं। वैसे यह एक सच्चाई है कि महंगाई केवल हम लोगों के देश में ही नहीं बढ़ी है बल्कि विश्व भर में बढ़ी है पर हां हमारे देश में कहीं ज्यादा बढ़ी है।

इस महंगाई की पीछे अनेक कारण सक्रिय हैं। महंगाई का एक बड़ा कारण समाज में फैला हुआ काला धन और उत्पादन का कम होना है। हमारे देश की आबादी जिस रफ्तार से बढ़ रही है उसे रफ्तार से हमारे देश में उपभोक्ता सामग्री का उत्पादन नहीं बढ़ा है जबकि उनका उत्पादन-व्यय काफी बढ़ गया है। ऐसी हालत में यह सामग्रियां स्वभावत: महँगे मूल्यों पर बाजार में आती है। विज्ञान वरदान या अभिशाप

दूसरी ओर आय की कम वृद्धि के कारण उपभोक्ताओं की क्रय-शक्ति बहुत कम गई है फिर भी महंगी चीज सस्ती नहीं हो पाती, करण दो नंबर का फालतू पैसा रखने वालों रखने वाले लोग उन्हें खरीद लेते हैं और पूरे समाज में अर्थव्यवस्था का दोहरा चक्र चलता रहता है।

अपने देश में महंगाई को बढ़ाने में मुद्रास्फीति की गहरी भूमिका है आज उत्पादित सामग्री और मुद्रा की आपूर्ति का संतुलन बेहद बिगड़ गया है।

बढ़ती महंगाई के और भी कई कारण है उदाहरण के लिए यातायात के साधनों का अभाव, मुनाफाखोरी के लिए छिपाकर अन्न भण्डार का जमा किया जाना और बाजार में उनका कृत्रिम अभाव, उपभोक्ता सामग्रियों के मूल्य पर अनेक प्रकार के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष करों का दबाव आदि ऐसे ही कारण है।

अब मूल्यों पर नियंत्रण पाने के लिए हमारी सरकार को काफी सावधानी और गंभीरता से कदम उठाना होगा। उसे उत्पादन वृद्धि को प्रोत्साहन देना होगा और उपभोक्ताओं की क्रय-शक्ति बढ़ानी होगी मुनाफाखोरी की प्रवृत्ति और सरकारी तंत्र में व्यापक भ्रष्टाचार को उसे कुचलना होगा तथा करो के संबंध में अधिक उदार एवं व्यवहारिक नीतियां निर्धारित करनी होगी। मुद्रास्फीति एवं काले धन पर तो जितना जल्द अंकुश लगाया जा सके राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए वह उतना ही लाभकारी सिद्ध होगा।

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