चष्टन वंश का इतिहास : History of Chastana Dynasty

चष्टन वंश

चष्टन वंश का संस्थापक चष्टन था।

रुद्रदामन उज्जैन का सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक था। उसने 130 से 150 ईसवीं तक सिंध, कोंकण, नर्मदाघाटी, मालवा, काठियावाड़ और गुजरात के एक बड़े भाग पर शासन किया।

रुद्रदामन ने महाक्षत्रप की उपाधि धारण किया था|

रुद्रदामन ने गिरनार की प्रसिद्ध सुदर्शन झील की बिना बेगार के मरम्मत करवाई। इस झील का निर्माण मौर्य काल में हुआ। इस समय सौराष्ट्र का प्रांतपाल सुविशाख था।

रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख संस्कृति में लिखित प्रथम अभिलेख था। इससे पूर्व के सभी अभिलेख प्रकृति में थे। इसने संस्कृत को राजकीय संरक्षण दिया।

सेल टन पोल अर्क के अनुसार। राजनीतिक प्रयोजनों हेतु संस्कृत का प्रयोग संभवतः शक शासकों द्वारा उनके राजनीतिक प्रभुत्व हेतु अपनाया गया।

यह संस्कृति नवाचार ही था कि एक नए युग का नाम उसके नाम पर रखा गया। अमेरिका में जन्मे शेल्डन पोलार्ड को भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया।

शकों के भारतीयकरण की प्रक्रिया को उनके वैवाहिक संबंधों से गति प्राप्त हुई। उनके अभिलेखों में संस्कृत का प्रयोग भी। उनके भारतीयकरण को दर्शाता है।

रुद्रदामन ने सतवाहन शासक वाशिष्ठी पुत्र पुलुमावी को दो बार प्रयोजित किया। किंतु निकट संबंधी होने के कारण उसे छोड़ दिया गया। जिसका उल्लेख जूनागढ़ अभिलेख में किया गया है।

रुद्रदामन चष्टन का पौत्र व जयदामन का पुत्र था।

गुप्त शासक चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य ने चौथी शताब्दी में अंतिम शक शासक रुद्र सिंह तृतीया को पराजित कर शक शक्ति का उन्मूलन कर दिया।

कार्य व प्रसिद्धी

रुद्रदामन प्रथम गंधर्व विद्या (संगीत) मे प्रवीण था।

रुद्रदामन नामक सिक्का शक शासक रुद्रदामन ने चलाया।

भारत में सर्वप्रथम संस्कृत व तिथि लेख युक्त सिक्के शक शासक रुद्रदामन ने चलाए|

अभिलेखों में रुद्रदामन को ‘भ्रष्टराज प्रतिस्थापक’ कहा गया है।

अन्धौ अभिलेख (कच्छ की खाड़ी) से पता चलता है कि रुद्रदामन ने चेष्टन के साथ सहशासक के रूप से शासन किया।

रुद्रदामन ने चांदी की मुद्राएं चलाई।

रुद्रदामन वैदिक अनुवाद धर्म अनुवादित।

शक-सतवाहन काल में सोने व चांदी के सिक्कों की विनिमय दर 1:35 था।

शकों की मुद्राएं ब्राही, खरोष्ठी, यूनानी तीन लिपियों युक्त थी|

भारत में सर्वप्रथम तिथियुक्त या संबत मुद्रा शकों ने जारी की।

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